अधिवक्ता पर हमला करने आये बदमाशों के विरोध में मड़ियाहूं में हुआ प्रदर्शन

मड़ियाहूं, जौनपुर। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के मुकुंदपुर गांव में एक अधिवक्ता के घर में जान से मारने की नियत से ताला तोड़कर घुसे आधा दर्जन से अधिक सशस्त्र बदमाश अधिवक्ता के नहीं मिलने पर घर के अंदर रखा दाल चावल का नुकसान कर फरार हो गये। पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर मड़ियाहू कोतवाली में सैकड़ो की संख्या में पहुंचे अधिवक्ताओं ने एक बार फिर पुलिस से शिकायत किया है।

बता दें कि मड़ियाहूं कोतवाली क्षेत्र के मुकुंदपुर गांव निवासी बृजलाल याद स्थानीय तहसील में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। बीते 24-25 अप्रैल की रात अधिवक्ता के भाई राजदेव यादव की तबीयत अचानक खराब हो जाने के कारण नगर के ही एक अस्पताल में भर्ती कराकर रात में अधिवक्ता एवं उनकी पत्नी मंजू देवी घर पर अकेली थी जिसका फायदा उठाते हुए अज्ञात आधा दर्जन से अधिक सशस्त्र बदमाशों ने रात में उनके घर पर धावा बोल दिया। बदमाशों ने दरवाजे पर लगी स्ट्रीट लाइट को बुझा दिया जिसके बाद उनके मुख्य गेट का ताला तोड़कर अंदर घुस गए‌।
अधिवक्ता ने बदमाशों की मंशा भांपकर और अपने को अकेला पाकर पत्नी सहित कमरे के अंदर रहना ही भलाई समझा और वह बदमाशों के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं किये। सशस्त्र बदमाशों ने जब अधिवक्ता को नहीं पाया तो चोरी का रूप देने के लिए उनके कई कमरों में घुसकर सामान को तितर—बितर कर दिया लेकिन कोई भी सामान उठाकर नहीं ले गये। पहले तो अधिवक्ता ने सोचा कि बदमाश चोरी की नीयत से घर में पहुंचे थे लेकिन जब दरवाजे पर और कमरों में लगा सीसीटीवी कैमरा को देखा तो अधिवक्ता के होश उड़ गए जितने बदमाश थे। सभी कुछ न कुछ हथियार एवं तमंचा अपने हाथों में लेकर लहरा रहे थे जिससे ससंशकित अधिवक्ता को विश्वास हो गया की अगर चोर होते तो चोरी कर सामानों को ले जाते, निश्चित है की उनको मारने के लिए किसी ने भेजा था।
अधिवक्ता तहसील बार अध्यक्ष सूर्यमणि यादव के साथ घटना के दूसरे दिन सुबह मड़ियाहूं कोतवाल इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह को लिखित देते हुए जानकारी दिया। बताया जाता है कि कोतवाल बीमारी का हवाला देते हुए दूसरे दिन घटना की जानकारी करने की बात कही। इसके बाद अधिवक्ता लौट गए। पुलिस द्वारा कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करने पर भयभीत अधिवक्ता ने बुधवार की सुबह घटना की जानकारी तहसील बार एसोसिएशन के महामंत्री देवेंद्र त्रिपाठी एवं अधिवक्ताओं में दिया। घटना की जानकारी सुनते ही अधिवक्ताओं में आक्रोश व्याप्त हो गया।
अधिवक्ता बैठक कर एक दिन के न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लेते हुए नारेबाजी करते हुए एक बार फिर कोतवाली में पहुंच गये और लिखित शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई करने की मांग किये। कोतवाल सत्य प्रकाश सिंह ने अधिवक्ताओं को बताया कि मेरी तबीयत खराब होने के कारण मैं घटनास्थल पर नहीं जा सका। इसके बाद अधिवक्ताओं ने कहा कि आपकी तबीयत खराब थी तो कोई भी दरोगा घटना की तहकीकात कर सकता था लेकिन यहां पर पूरी तरह लापरवाही बरती गई है। अधिवक्ता के साथ कोई भी घटना हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी भी आपकी होगी। इसके बाद कोतवाल साहब ने कहा कि शान्ति समिति की बैठक के बाद मैं खुद जाकर देखूंगा।
पूर्व अध्यक्ष कृष्ण कुमार सिंह ने घटना की निंदा करते हुए बताया कि अगर इसी तरह पुलिस लापरवाह बनी रही तो निश्चित है कि बदमाश अधिवक्ता की हत्या कर देंगे। वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रेश यादव ने कहा कि अगर पुलिस मुकदमा नहीं दर्ज करती तो अनिश्चितकाल के लिए न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया जायेगा।
पीड़ित अधिवक्ता बृजलाल यादव ने बताया कि घटना के पीछे कुछ समझ में नहीं आ रहा है लेकिन मेरा कुछ जमीनी विवाद काफी दिनों से चला रहा है। ऐसा आसन का है कि उन्हीं लोगों द्वारा भी यह घटना कार्य कराया जा सकता है। फिलहाल सीसीटीवी में बदमाशों की पहचान नहीं हो पा रही है लेकिन एक बात जरूर है कि उसे रात अगर हम कमरे से बाहर निकले होते तो मेरी निश्चित ही हत्या हो जाती। मुझे ही मारने के लिए बदमाश आए थे। शिकायत के बाद भी अभी तक पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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