45 वर्ष बाद मिला न्याय, निर्दोश होने से पहले पांच लोग पहुंच गये स्वर्गलोक
जौनपुर। हत्या के अरोप में उम्र कैद की सजा पाये नौ लोगों को 45 वर्ष बाद न्याय मिला है। इसमें से पांच लोग अपने आपको निर्दोश साबित करने से पहले ही काल के गाल में समा चुके है। जो लोग बचे है वे भी जिन्दगी की आखिरी पड़ाव पहुंच चुुके है। हलांकि इन सभी का जीवन जेल, कोर्ट कचेहरी का चक्कर काटने में तबाह हो गया है।
सिकरारा थाना क्षेत्र के ताहिरपुर गांव में 5 जुलाई 1979 में गन्ने के खेत में जानवर चले जाने के विवाद में लाठी डण्डे से पीटकर बलीराम यादव की हत्या कर दी गयी थी। इस हत्या का इल्जाम गांव के सुबेदार चौहान, सुरेन्द्र चौहान रामकिशुन चौहान, राजेन्द्र चौहान, बहादुर चौहान, फौजदार चौहान, रामचंद्र चौहान, महेन्द्र चौहान और नाबालिंग तेरस चौहान पर लगा था। पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। एक वर्ष बाद आठ आरोपीे कोर्ट से जमानत पर जेल से बाहर आये उसके बाद नाबालिंग तेरस न्यायालय में आत्मसमर्पण किया तीन माह उसे भी वेल मिल गया।
सिविल कोर्ट ने सभी आरोपियों को 1983 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा दिया।
सजा के खिलाफ सभी ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल किया। हाईकोर्ट में सुनावाई के दरम्यान ही सुबेदार चौहान, सुरेन्द्र चौहान रामकिशुन चौहान, राजेन्द्र चौहान, बहादुर चौहान की मौत हो गयी।
हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को 15 मई 2024 को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट से न्याय मिलने के बाद सभी खुश है।
भरी जवानी में हत्या का आरोप लगने के कारण इन सभी जिन्दगी जेल की सलाखों के पीछे या कोर्ट कचेहरी का चक्कर काटते हुए बीती।
सजा काटने वाले में जो चार लोग जिन्दा बचे है उसमें फौजदार चौहान की उम्र 83 वर्ष, रामचंद्र चौहान 82 वर्ष महेन्द्र की उम्र 75 वर्ष तथा तेरस चौहान की उम्र 56 वर्ष है।
झूठा आरोप लगाने वाले को दंडित करने का कानून बनना चाहिए
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