ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में उमड़ी भीड़
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जौनपुर । ईद मिलादुन्नबी का जलसा व जुलूस का आगाज परम्परा के अनुसार मछली शहर पड़ाव स्थित शाही ईदगाह के प्रागंण से हुआ। सर्वप्रथम शाही ईदगाह के प्रागंण मे एक जलसा हाजी अफजाल के सरपरस्ती में हुआ। इसमें भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जलसे का आगाज तिलावते कुरान पाक से कारी जिया ने किया। इस मौके पर अपने संबोधन मे सेकेट्री ने बताया कि इस्लामिक महीने के रबीउल अव्वल के 12 तारिख को नबिओ तथा पैगंबरो की कड़ी मे आखिरी नबी हजरत मोहम्मद का जन्म अरब के मक्का शहर मे 22 अप्रैल 571 ईस्वी मे हुआ और उनकी वफात 8 जून 632 ईस्वी में हुआ। उस वक्त पुरे अरब मे जाहिलियत फैली हुई थी लड़कियो को पैदा होने पर पटक पटक मार दिया जाता था। इसके अलावा आपसी लड़ाईयो में लोग मशगूल रहते थे। लोग अपनी नसलो को लड़ाई न खत्म करने की वसीयत कर मरते थे। जुआ ,शराब,शिर्क जैसी तमाम बुराईया समाज मे व्याप्त थी। ऐसे मे हजरत मोहम्मद ने जन्म लिया और समाज मे फैली बुराईयो को खत्म किया तथा धीरे धीरे समाज को सुधार कर इस्लाम के पैगाम को पुरी दुनिया मे फैलाया। आप पर ही ईश्वरीय किताब कुरान नाजिल हुई और अब कयामत तक न कोई नया धर्म और न कोई पैगंबर पैदा होगा। जलसे का संचालन नेयाज ताहिर शेखू ने किया इसके बाद जुलूस को हरी झंडी दिखा कर कमेटी के सदर मिर्जा दावर बेग व अरशद कुरैशी ने संयुक्त रूप से रवाना किया। जुलूस मे तमाम अजुमने हुजूर की शान मे नात पढ़ रही थी तथा अल्लाह का हम्द बया कर रही थी। शहर व जिले तथा बाहर से आए हुए तमाम अखाड़े अपने हुनर का मुजाहरा कर रहे थे। जुलूस अपने कदीमी रास्तो से होता हुआ शाही पुल,चाहरसू चौराहे, कोतवाली चौराहे तथा अलफस्टिनगंज होता हुआ अटाला मस्जिद देर रात पहुचता है जहा वो एक जलसे मे तब्दील हो गया है। इस बीच कोतवाली चौराहे पर मरकजी सिरत कमेटी का आपसी भाईचारा के सिलसिले मे कौमी यकजहती का प्रोग्राम हुआ। शहर को दुल्हन की तरह सजाया गया था।