गंदगी देख भड़के डीएम , सफाई कर्मचारी निलम्बित
https://www.shirazehind.com/2019/11/blog-post_24.html
जौनपुर। जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह द्वारा विकास खण्ड बक्शा,
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा चुरावनपुर ग्राम का औचक निरीक्षण किया गया।
विकासखण्ड के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए कार्यों, शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री आवास की जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने खण्ड विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि प्रतिदिन शौचालय निर्माण कार्य का निरीक्षण करें। लेखपाल, पंचायत सचिव, आशा, आंगनबाड़ी, सफाईकर्मी, रोजगार सेवक का नाम, मोबाइल नंबर प्रत्येक गांव की प्रमुख दीवारों पर लिखवाये। लेखपाल तथा सचिव किस दिन किस गांव में रहेंगे इसका भी उल्लेख करे। जिलाधिकारी ने विकास खण्ड परिसर में गंन्दगी देखकर नाराजगी व्यक्त की और जल्द से जल्द सफाई कराने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बक्शा में मरीजो से स्वास्थ्य केन्द्र द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की । उन्हाने मरीजो से पूंछा की डा. साहब समय से मिलते है कि नही, बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में हुया या प्राईवेट। उन्हाने कहा कि झोलाछाप डाक्टरों के विरूध कार्यवाही की जायेगी।
चुरावनपुर ग्राम के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाबूराम पुत्र राजाराम से शौचालय एवं आवास की जानकारी पाप्त की और ग्रामीणों को शौचालय का प्रयोग करने की नसीहत भी दी। ग्रामीणों से पूंछा कि आशा,एएनम गांव में नियमित रूप से आती है कि नही। उन्होने ग्राम प्रधान को निर्देशित किया कि ग्राम में मनरेगा के तहत अधिक से अधिक कार्य कराये ताकि ग्रामीणो को रोजगार के साथ ही गांव का विकास किया जा सके। जिलाधिकारी ने गांव मे फैली गदंगी देखकर कडी नाराजगी व्यक्त की और सफाईकर्मी को निलम्बित करने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालय चुरावनपुर का निरीक्षण किया गया। उन्होंने बच्चों से मिड-डे-मील की जानकारी प्राप्त की। बच्चों ने बताया कि प्रतिदिन मिड-डे-मील मिल रहा है। जिलाधिकारी द्वारा बच्चों को दी जा रही शिक्षा की हकीकत बच्चों से सवाल पूंछकर जानी। उन्होंने बच्चों से पहाड़ा सुना। सभी बच्चों से साफ-सफाई के साथ ड्रेस में विद्यालय आने को कहा। बच्चों को प्लास्टिक का प्रयोग न करने के लिए भी प्रेरित किया। जिलाधिकारी ने प्रधानाचार्य श्यामलाल मौर्य को बच्चो में शिक्षा का स्तर उपर उठाने को कहा। रजिस्टर में बच्चों की अकिंत संख्या के सापेक्ष कम उपस्थिति होने पर प्रधाानाचार्य को बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रेरित करने को कहा ।
विकासखण्ड के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत कराए गए कार्यों, शौचालय निर्माण, प्रधानमंत्री आवास की जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने खण्ड विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि प्रतिदिन शौचालय निर्माण कार्य का निरीक्षण करें। लेखपाल, पंचायत सचिव, आशा, आंगनबाड़ी, सफाईकर्मी, रोजगार सेवक का नाम, मोबाइल नंबर प्रत्येक गांव की प्रमुख दीवारों पर लिखवाये। लेखपाल तथा सचिव किस दिन किस गांव में रहेंगे इसका भी उल्लेख करे। जिलाधिकारी ने विकास खण्ड परिसर में गंन्दगी देखकर नाराजगी व्यक्त की और जल्द से जल्द सफाई कराने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बक्शा में मरीजो से स्वास्थ्य केन्द्र द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की । उन्हाने मरीजो से पूंछा की डा. साहब समय से मिलते है कि नही, बच्चे का जन्म सरकारी अस्पताल में हुया या प्राईवेट। उन्हाने कहा कि झोलाछाप डाक्टरों के विरूध कार्यवाही की जायेगी।
चुरावनपुर ग्राम के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने बाबूराम पुत्र राजाराम से शौचालय एवं आवास की जानकारी पाप्त की और ग्रामीणों को शौचालय का प्रयोग करने की नसीहत भी दी। ग्रामीणों से पूंछा कि आशा,एएनम गांव में नियमित रूप से आती है कि नही। उन्होने ग्राम प्रधान को निर्देशित किया कि ग्राम में मनरेगा के तहत अधिक से अधिक कार्य कराये ताकि ग्रामीणो को रोजगार के साथ ही गांव का विकास किया जा सके। जिलाधिकारी ने गांव मे फैली गदंगी देखकर कडी नाराजगी व्यक्त की और सफाईकर्मी को निलम्बित करने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालय चुरावनपुर का निरीक्षण किया गया। उन्होंने बच्चों से मिड-डे-मील की जानकारी प्राप्त की। बच्चों ने बताया कि प्रतिदिन मिड-डे-मील मिल रहा है। जिलाधिकारी द्वारा बच्चों को दी जा रही शिक्षा की हकीकत बच्चों से सवाल पूंछकर जानी। उन्होंने बच्चों से पहाड़ा सुना। सभी बच्चों से साफ-सफाई के साथ ड्रेस में विद्यालय आने को कहा। बच्चों को प्लास्टिक का प्रयोग न करने के लिए भी प्रेरित किया। जिलाधिकारी ने प्रधानाचार्य श्यामलाल मौर्य को बच्चो में शिक्षा का स्तर उपर उठाने को कहा। रजिस्टर में बच्चों की अकिंत संख्या के सापेक्ष कम उपस्थिति होने पर प्रधाानाचार्य को बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रेरित करने को कहा ।