प्रतिबन्ध के बावजूद खुलेआम पालीथिन का हो रहा है प्रयोग
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जौनपुर। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में 50 माइक्रॉन से पतली पॉलीथिन धड़ल्ले से इस्तेमाल की जा रही है। नगर पालिका व तहसील प्रशासन के अभियान महज औपचारिकता बनकर रह गए हैं। बाजार में छोटे से लेकर बड़े सभी व्यापारी खुलेआम प्रतिबंधित पॉलीथिन का उपयोग कर रहे हैं। प्रदेश सरकार ने पिछले साल 15 जुलाई से पॉलीथिन पर पूर्णतया पाबंदी लगा दी थी, मगर अफसरों की ढिलाई के चलते अभी भी बाजार पर पॉलिथीन का कब्जा बरकरार है। शासनादेश के तहत दुकानदारों के साथ-साथ इस्तेमाल करने वालों के भी खिलाफ कार्रवाई के निर्देश हैं। जागरूकता के अभाव में पॉलीथिन का प्रयोग लोगों की आदत में इस कदर शुमार हो गया है कि इक्का-दुक्का ग्राहक ही घर से थैला लेकर चलता है। शहर में ऐसी कोई दुकान नहीं है, जहां पर ग्राहकों को पालीथिन में रखकर वस्तु न दी जा रही हो। दूध, तेल से लेकर आटा, दाल, नमक, सब्जी और फल सभी को पॉलीथिन में रखकर ही बेचा जा रहा है। आलम यह है कि बाजार से लेकर गली-मोहल्लों में जहां देखो पॉलीथिन कचरे का अंबार लगा दिखाई देता है। पॉलीथिन और प्लास्टिक गांव से लेकर शहर तक लोगों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। प्लास्टिक के ग्लासों में चाय या फिर गर्म दूध का सेवन करने से उसका केमिकल लोगों के पेट में चला जाता है। इससे डायरिया के साथ अन्य गंभीर बीमारियां होती हैं। पशुओं की अकाल मौत हो रही है। ज्यादातर लोग पॉलीथिन की थैलियों में फालतू सामान व कचरा भरकर बाहर फेंकते हैं। कूड़े के ढेर में खाद्य सामग्री खोजते हुए पशु इन थैलियों को निगल जाते हैं। इससे आंत खराब होने के बाद धीरे-धीरे पशु मौत के मुंह में समा जाता है। नगर पालिका के अधिषासी अधिकारी का कहना है कि पॉलीथिन के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पकड़े जाने पर जुर्माना भी वसूला जाता है। इस मामले लोगों को भी जागरूक होना होगा और दुकानदार से पालीथिन की मांग करने के बजाए कपड़े के थैले ही उपयोग में लाना चाहिए।