वर्तमान सांसद, दो ओबीसी महिला समेत आधा दर्जन प्रत्याशियों पर होमवर्क कर रही भाजपा

जौनपुर। नामाकंन की तारीख नजदीक आ गया है ऐसे में भाजपा,कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशियों के नामो की घोषणा न होने के कारण सभी पार्टियों के नेताओ,कार्यकर्ताओ और राजनीति रूचि रखने वालों असमंजस स्थिति बनी हुई है। पिछले चुनाव में इस सीट पर मोदी की लहर के चलते भाजपा प्रत्याशी के पी सिंह बसपा प्रत्याशी सुभाष पाण्डेय एक लाख 46 हजार वोटो के अतंर से जीत दर्ज किया था। इस चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन होने के कारण भाजपा की राह गठिन कर दिया है। पिछले चुनाव में मिले दोनो पार्टियों के वोटो को जोड़ दिया जाय तो गठबंधन भाजपा से करीब 44 हजार वोटो से आगे है। इसी आकड़े ने भारतीय जनता पार्टी को प्रत्याशी उतारने के लिए काफी गुणागणित लगाना पड़ रहा है।
2014 लोकसभा चुनाव में मोदी की प्रचण्ड आंधी चल रही थी इस चुनाव मेें बीजेपी ने पूर्व मंत्री व भाजपा के बरिष्ठ नेता स्व0 उमानाथ सिंह के पुत्र कृष्ण प्रताप सिंह को गुमनामी से निकालकर टिकट दिया था। जब उनके नामो की घोषणा हुआ तो पार्टी नेताओ के अलावा उन्हे कोई जानता नही था लेकिन मोदी की आंधी ने उन्हे सड़क उठाकर संसद में पहुंचा दिया। उन्हे कुल तीन लाख 67 हजार 149 वोट मिला था जबकि बीएसपी उम्मीद्वार सुभाष पाण्डेय को दो लाख 20 हजार 839 मत मिला था। सपा के पारसनाथ यादव के खाते एक लाख 80 हजार तीन वोट आया था। उधर निर्दल प्रत्याशी पूर्व सांसद धनंजय सिंह को 64 हजार 137 वोट, आप प्रत्याशी डा0 केपी यादव को 43 हजार 371 मत और कांग्रेस प्रत्याशी रवि किशन को 42 हजार 759 वोट मिला था।
2019 लोकसभा चुनाव में यूपी में सपा-बसपा गठबंधन ने भाजपा की गणित विगाड़ दिया है। हलांकि अभी ने किसी पार्टी ने अपना पत्ता नही खोला है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा इस सीट पर पुनः कब्जा करने के लिए वर्तमान सांसद समेत करीब आधा दर्जन प्रत्याशियों की कुण्डली खंगाल रही है। इसमें दो ओबीसी महिला भी शामिल है। इन प्रत्याशियों की छवि, जातियों के वोट व अन्य पहलुओं पर गहन अध्यन कर रही है। माना जा रही है कि यदि वर्तमान सांसद स्थित खराब मिला तो ओबीसी महिला को भाजपा मैदान में उतार सकती है।
उधर राजनीतिक विश्लेषणों की माने तो अगर सपा- बसपा गठबंधन के आंकड़ों को पार पाना होगा तो एनडीए को इस सीट से एक ऐसे उम्मीदवार की तलाश रहेगी जिसके प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तित्व से इस सीट पर जीत हासिल की जा सके। निषाद पार्टी से गठबंधन करने के पश्चात एनडीए गठबंधन  ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहती है जो सपा - बसपा के वोटरों में सेंध लगाने में सक्षम हो। अगर भाजपा यह सीट अपने सहयोगी निषाद पार्टी को दे देती है तो निश्चित रूप से अपने व्यक्तिगत वोट बैंक के आधार पर वह सपा-बसपा गठबंधन को आसानी से मात दे सकती है। जौनपुर निर्वाचन क्षेत्र से निषाद वोटरों की अच्छी खासी संख्या है ।

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