श्रद्धा से पूजे गये शिल्पदेव विश्वकर्मा
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जौनपुर। जिले भर मंे शिल्पदेव भगवान विश्वकर्मा के जन्म दिवस के अवसर पर अनेक स्थानों पर उनकी प्रतिमा स्थापित कर विधि विधान से पूजन किया गया और भजन कीर्तन सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कल कारखानों, गैरेजो सहित कार्यशालाओं की साफ सफाई तथा सजावट कर भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया गया। नगर में आधा दर्जन स्थानों पर उनकी भव्य प्रतिमा पण्डालों में स्थापित किया गया था। जहां देर शाम तक अनेक कार्यक्रमों की धूम रही और लोगों को प्रसाद वितरति किया गया। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के मेकैनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विश्वकर्मा जयंती के अवसर विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया। मेकैनिकल वर्कशॉप में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थी शिक्षक मौजूद रहे। विभागाध्यक्ष डॉ संदीप सिंह ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा को शृष्टि का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। पूजा में कुलसचिव श्री सुजीत कुमार, प्रोफेसर बी बी तिवारी , प्रोफेसर एके श्रीवास्तव , प्रोफेसर वी डी शर्मा , डाव रजनीश भास्कर ,डाव राजकुमार, डा0 संतोष कुमार, दीप प्रकाश सिंह, सीपी सिंह, संतोष उपाध्याय आदि मौजूद रहे। ज्ञात हो कि हिदू धर्मग्रंथों के मुताबिक भगवान विश्वकर्मा को अविष्कार व निर्माण का देवता माना जाता है। मान्यता है कि सीतापुर जिले में मिश्रिख में महार्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया था। जिससे भगवान इंद्र ने वृत्तासुर नामक दैत्य का संहार किया था। इसके अलावा भगवान विश्वकर्मा ने लंका, द्वारिकापुरी आदि महलों व नगरों का निर्माण भी किया। देवताओं के लिए विभिन्न वाहनों व शस्त्रों का भी निर्माण किया।