बच्चों को डरा रहे हैं कंप्युटर गेम

जौनपुर। बच्चों में कम्प्यूटर गेम की लत अब खतरनाक साबित हो रहा है। स्क्रीन पर आने वाले डरावने गेम्स से बच्चों के शरीर पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसके बावजूद बच्चे डरावने गेम्स से परहेज नहीं कर रहे। कुछ समय पहले तक बच्चों के लिए प्रमुख रूप से लूडो, कैरम आदि खेल ही होते थे। इसके अलावा बच्चे कबड्डी, फुटबॉल सहित अन्य खेलों पर ध्यान लगाते थे। इन खेलों से उनका मानसिक और शारीरिक विकास होता था। आज इन दोनों खेलों से जुड़ी तमाम प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं लेकिन इन दोनों खेलों में अन्य खेलों की अपेक्षा कम रुचि दिख रही है। मोबाइल, कम्प्यूटर और इंटरनेट का प्रचलन अधिक होने से बच्चों का फोकस कम्प्यूटर गेम्स पर अधिक रहता है। उसमें भी जो डरावने खेल होते हैं, उन्हें वे घंटों खेलते रहते हैं। बच्चे स्कूलों से आने के बाद अपना अधिकतर समय कम्प्यूटर पर बिताते हैं। ज्यादा समय तक गेम्स खेलने से कम्प्यूटर से निकलने वाली रेडिएशन से बच्चों की आंखों के खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा नजर कमजोर हो जाती है। शुरुआत में सिरदर्द की शिकायत सामने आती है। इससे शारीरिक विकास भी रुक जाता है। बच्चे अधिक गेम्स खेलने से चिड़चिड़े हो जाते हैं। चिकित्सक बच्चों को अधिक समय तक कम्प्यूटर पर गेम्स न खेलने की सलाह देते हैं मगर एक बार इनकी लत लग जाने पर उसे छुड़ा पाना मुश्किल होता है। डरावने गेम्स देखने से बच्चों के दिमाग में वे ²श्य हर वक्त चलते रहते हैं। रात में सपने भी इन्हीं के आते हैं जिससे बच्चे डर जाते हैं। यह समस्या अब बीमारी का रूप लेता जा रहा है, जिससे अभिभावकों को सावधान होने की जरूरत है।

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