संसार से रूखसत होने से पहले प्रभु परमात्मा को जान ले
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जौनपुर। परमात्मा ने सृष्टि की रचना बहुत ही खूबसूरत अंदाज में की है। ऐसा सुन्दर यह संसार बनाया है जिसमें विविधता होते हुए भी खूबसूरती है, लेकिन देखा यह जा रहा है कि इंसान ही कुदरत की सुन्दरता को कुरूपता देने का प्रयत्न कर रहा है।
उक्त उद्गार संत निरंकारी सत्संग भवन लखमापुर और माँ शीतला धाम चैकिया चैराहे के पास प्राईमरी पाठशाला के बगल मैदान में आयोजित निरंकारी सत्संग समारोह में उपस्थित विशाल संत समूह को सम्बोधित करते हुए दिल्ली से आये विद्वान संत पं0 अब्दुल गफ्फार खांन जी ने व्यक्त किया इंसान भौतिक सुविधाओं और दुनियावी प्राप्तियों के लिए तो भागा जा रहा है लेकिन जो सबसे अहंम पहलू परमात्मा की प्राप्ति वह उसके दिलो दिमांग में भी नहीं है। संतो महापुरूषों ने कितने तरीको से इंसान को समय-समय पर समझाया है परन्तु गफलत की नींद में सोया इंसान इस ओर कदम ही नहीं बढ़ाता। वास्तव में इंसान जीवन के मनोरथ को भूल गया है। जीवन के सुन्दरता मन के भावों को सुन्दर बनाने से होती है। इंसान भ्रमो में ही जी रहा है ऐसे आयोजनों का यही मक्सद है कि इंसान जीवन को सार्थक करें। समय जो बीता है वह बीत गया, जो समय निकल गया वह फिर से हाथ आने वाला नही। मावन जीवन अवसर है भ्रमों से निकलने का और सत्य में स्थित होने का। भक्त निराकार को ही जीवन का आधार बनाते है। इसी का आधार जीवन के रूतबे को बुलन्द करता है। इसके अहसास के साथ जीवन जीने वालों का ही रूतबा बुलन्द होता है। जीवन में निखार लाने के लिए मन को सुन्दर भावों से युक्त करने पर बल देते हुए कहा कि जिसका मन सुन्दर हो जाता है उसके जीवन में सुन्दरता आ जाती है। मन में सुन्दरता भी तभी आएगी जब इस परमात्मा को मन में बसाया जाएगा। इसलिए मन का सुन्दर होना बहुत जरूरी हैं भक्त जहां स्वयं का जीवन निखारते है वहीं संसार को निखार देने का भी कारण बनते है।
मंच का संचालन- उदयनारायण जायसवाल जी ने किया।
मुख्य वक्ता- सत्यवीर दिवाना जी, निशा खान जी, दिनेश टण्डन (पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष) श्याम लाल साहू जी (संयोजक), राजेश प्रजापति जी (क्षे0 संचालक), डाॅ0 खुर्शीद अहमद जी, शकील अहमद जी, रामबचन यादव जी, अजीत जी इत्यादि लोग उपस्थित रहे।
उक्त उद्गार संत निरंकारी सत्संग भवन लखमापुर और माँ शीतला धाम चैकिया चैराहे के पास प्राईमरी पाठशाला के बगल मैदान में आयोजित निरंकारी सत्संग समारोह में उपस्थित विशाल संत समूह को सम्बोधित करते हुए दिल्ली से आये विद्वान संत पं0 अब्दुल गफ्फार खांन जी ने व्यक्त किया इंसान भौतिक सुविधाओं और दुनियावी प्राप्तियों के लिए तो भागा जा रहा है लेकिन जो सबसे अहंम पहलू परमात्मा की प्राप्ति वह उसके दिलो दिमांग में भी नहीं है। संतो महापुरूषों ने कितने तरीको से इंसान को समय-समय पर समझाया है परन्तु गफलत की नींद में सोया इंसान इस ओर कदम ही नहीं बढ़ाता। वास्तव में इंसान जीवन के मनोरथ को भूल गया है। जीवन के सुन्दरता मन के भावों को सुन्दर बनाने से होती है। इंसान भ्रमो में ही जी रहा है ऐसे आयोजनों का यही मक्सद है कि इंसान जीवन को सार्थक करें। समय जो बीता है वह बीत गया, जो समय निकल गया वह फिर से हाथ आने वाला नही। मावन जीवन अवसर है भ्रमों से निकलने का और सत्य में स्थित होने का। भक्त निराकार को ही जीवन का आधार बनाते है। इसी का आधार जीवन के रूतबे को बुलन्द करता है। इसके अहसास के साथ जीवन जीने वालों का ही रूतबा बुलन्द होता है। जीवन में निखार लाने के लिए मन को सुन्दर भावों से युक्त करने पर बल देते हुए कहा कि जिसका मन सुन्दर हो जाता है उसके जीवन में सुन्दरता आ जाती है। मन में सुन्दरता भी तभी आएगी जब इस परमात्मा को मन में बसाया जाएगा। इसलिए मन का सुन्दर होना बहुत जरूरी हैं भक्त जहां स्वयं का जीवन निखारते है वहीं संसार को निखार देने का भी कारण बनते है।
मंच का संचालन- उदयनारायण जायसवाल जी ने किया।
मुख्य वक्ता- सत्यवीर दिवाना जी, निशा खान जी, दिनेश टण्डन (पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष) श्याम लाल साहू जी (संयोजक), राजेश प्रजापति जी (क्षे0 संचालक), डाॅ0 खुर्शीद अहमद जी, शकील अहमद जी, रामबचन यादव जी, अजीत जी इत्यादि लोग उपस्थित रहे।