दिन-दुःखियों की सेवा करना सबसे बड़ी सेवा: संत शिरोमणि

जौनपुर। पूर्वांचल की आस्था का केंद्र शीतला चौकियां धाम में श्रीमद्भागवत कथा व श्रीराम कथा प्रवचन के तीसरे दिन महराष्ट्र से पधारे संत शिरोमणि स्वामी आत्मा प्रकाश जी महराज ने कहा कि दिन दुःखियों की सेवा करना, पीड़ितों की सहायता करना, भूखे को भोजन कराना, गरीब बहन बेटियों की शादी विवाह में सहयोग करना ही सबसे बड़ी सेवा है। जो मानव अपने जीवन में इन सभी कार्यों को करता है। परमात्मा उससे बहुत प्रसन्न होते हैं। उसके जीवन में कभी कठिनाई नहीं आ सकती। परमात्मा उस प्राणी के साथ पग-पग पर साथ रहते हैं। सत्संग स्वाध्याय कलयुग में जीव कल्याण का सबसे श्रेष्ठ साधन है। परमात्मा कहते हैं जप यज्ञ में मैं हूँ परमात्मा के नाम का जप सबसे बड़ा यज्ञ है। भाई को पीड़ा देना सबसे बड़ा पाप है। भूखों का जाति धर्म नहीं होता। असहाय भूखों की मदद करना सबसे बड़ा तीर्थ है। समाज व किसी के जीवन में कलह पैदा करने वाला सबसे बड़ा पापी होता है। किसी के जीवन में कल्याण करना सबसे बड़ा पुण्य है। नम्रता के 3 लक्षण हैं। कड़वी बात का मीठा जवाब देना, क्रोध आने पर चुप रहना, यदि किसी को दंड देना ही पड़े तो उस समय चित्त को कोमल रखे। इस अवसर पर अमरनाथ वर्मा, विपिन माली, राहुल त्रिपाठी, विनय गिरि, सुजीत त्रिपाठी, पवन त्रिपाठी, आनंद त्रिपाठी, विजय पंडा, छोटेलाल श्रीमाली सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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