स्कूली वाहनों के नियम महज कागजों पर
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जौनपुर। स्कूली वाहनों के लिए नियम कायदे बनाए तो गए लेकिन सिर्फ कागजों पर लिखने के लिए। जिन वाहनों से बच्चों को स्कूल लाया व लेकर वापस जाया जा रहा है। वे मानक स्केल के अंतिम बिंदु पर भी खरे नहीं हैं। इन वाहनों में बच्चों को ठूस-ठूस कर भरा जा रहा है। अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स तो दूर की बात कहीं-कहीं तो वाहनों में सामने की ओर शीशा तक नहीं है। एआरटीओ और ट्रैफिक पुलिस को मानो यह सब दिखाई ही नहीं देता। कई हादसे होने के बावजूद जिम्मेदार नींद से जाग नहीं रहे हैं। जिले में स्कूली वाहन कई दुर्घटनाग्रस्त हो चुके है। जिसमें सवार चार बच्चे घायल हो गए थे। इन हादसों के होने के बादय प्रशासन ने स्कूल संचालकों के साथ बैठक करके दिशा निर्देश दिए थे लेकिन इसके बाद भी शहर में मानक विहीन वाहन धड़ल्ले से फर्राटा भर बच्चों को जीवन से खिलवाड़ करते नजर आ रहे हैं। कई स्कूली वाहन तो सवारी ढोते देखे जाते हैं। शायद प्रशासन को देश के नौनिहालों के भविष्य की चिन्ता नहीं है। नगर के कई स्कूलों में ऑटो से बच्चे पहुंचते है। हालात ये है इन ऑटो में पांच लोगों के बैठने की सीट होती है लेकिन ये लोग 10 से 12 बच्चे बैठा कर चलते हैं। इसके चालक वर्दी भी नहीं पहनते।शहर में संचालित अधिकांश स्कूलों के वाहनों में सुरक्षा मानक ताक पर धरे हैं। स्कूल चालक समेत जरूरी फोन नंबर तक गाड़ियों पर दर्ज नहीं है। अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स भी गायब है। कुछ के पास तो परमिट भी नहीं है। नगर के कई स्कूलों में ऑटो से बच्चे पहुंचते है। हालात ये है इन ऑटो में पांच लोगों के बैठने की सीट होती है लेकिन ये लोग 10 से 12 बच्चे बैठा कर चलते हैं। इसके चालक वर्दी भी नहीं पहनते। शहर में संचालित अधिकांश स्कूलों के वाहनों में सुरक्षा मानक ताक पर धरे हैं। स्कूल चालक समेत जरूरी फोन नंबर तक गाड़ियों पर दर्ज नहीं है। अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बॉक्स भी गायब है। कुछ के पास तो परमिट भी नहीं है।