अनन्त चतुर्दशी पर श्री विष्णु का पूजन

 
जौनपुर। भारतीय संस्कृति में पर्वो का खास महत्व है। सभी पर्व खास देवी देवताओं से जुड़े है। व्रत त्योहार भक्तिभाव से मनाने की परंपरा है। इसी के तहत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी का पर्व गुरूवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस मौके पर ब्रहम मुहूर्त में उठाकर स्नान ध्यान के पश्चात अपने आराध्य देवी देवी देवताआंे की पूजा के उपरान्त अनन्त चतुर्दशी के व्रत का संकल्प लिया। इसके पश्चात कच्चे सूत के धागे को 16 गांठ लगाकर इसे हल्दी से रंगने के पश्चात विधि विधान पूर्वक अक्षत , धूप, नैवेद्य, पुष्प आदि से पूजन किया। इस सूत्र को पुरूष दाहिने हाथ में तथा महिलायें बाये हाथ में धारण किये। इसे 14 दिन तक 14 धारण किये रहना चाहिए। इसके पश्चात 15 वें दिन गंगा अथवा स्वच्छ जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।तदोपरान्त अनन्त चदुर्दशी कथा का श्रवण किया। कहा जाता है कि इस व्रत को 14 वर्ष तक विधि पूर्वक करने पर जीवन के सभी दोषों का नाश होता है तथा सुख , समृद्धि व सफलता का सुयोग बना रहता है। पुराणों में कहा गया है कि कि इसी दिन क्षीर सागर में शेष नाग की शैया पर शयन करने वाले श्री विष्णु की पूजा की जाती है।

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