कमीशन खोरी की भेंट चढ़ा मेडिकल कालेज
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जौनपुर। जिले के विकास की कड़ी में जुड़ने वाला राजकीय मेडिकल कालेज का निर्माण एवं शिक्षण कार्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप शायद ही पूरा नहीं पायेगा। सरकारी तंत्र प्रदेश के सीएम के ऐलान को गम्भीरता से नही ले रहा है। कालेज के निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहें है। जो जिला प्रशासन एवं कार्यदायी संस्था को सवालो के कटघरे मे खड़ा कर रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने 25 सितम्बर 2014 को 60 एकड़ के पुराने कताई मिल की जमीन पर राजकीय मेंडिकल कालेज का शिलान्यास करते हुए कहा था कि इस राजकीय मेडिकल कालेज का निर्माण किसी भी दशा में 2016 के पहले पूरा हो जायेगा इसमें मेडिकल की पढ़ायी शुरु हो जायेगी। धन की समस्या निर्माण कार्य में ब्यवधान नही बनेगी। उद्धाटन के साथ ही इसके निर्माण हेतु बजट रु0 554.16 करोड़ का स्वीकृत कर जारी करा दिया था। निर्माण का दायित्व राजकीय निर्माण इकाई आजमगढ़ को दे दिया गया। लेकिन कई माह तक कार्यदायी संस्था एवं ठेकेदारो के बीच उलझा निर्माण कार्य आज भी अधूरा हैं। जिस गति से मेडिकल कालेज का काम चल रहा है उससे नही लगता की प्रदेश सरकार के सीएम इस वर्ष उद्घाटन कर सकेंगे । इस कालेज की स्वीकृति के बाद जमीन तलाशने में जिला प्रषासन ने लगभग डेढ़ साल लगा दिया। जमीन न मिल पाने पर वर्ष 2013 से बन्द चल रही कताई मिल के ताबूत मे अन्तिम कील ठोंकते हुए उसकी 60 एकड़ जमीन राजकीय मेडिकल कालेज को एलाट कर दिया साथ ही साथ मिल परिसर के सामने स्थित राजकीय औद्योगिक कालेज (आईटीआई) की 40 एकड़ जमीन लेकर कुल 100 एकड़ मे राजकीय मेडिकल कालेज के निर्माण की कार्ययोजना बनायी गयी। गुणवत्ता को लेकर कई बार जिलाधिकारी खुद कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण इकाई आजमगढ़ को फटकार लगा चुके है। लेकिन कार्यदायी संस्था एवं ठेकेदारो पर इसका कोई असर मानो नही है। अव्वल ईंट की जगह दोयम ईंट का प्रयोग धड़ल्ले से कर रहे है । एक सात के मिश्रित सीमेण्ट बालू से कालेज का भवन निर्मित हो रहा है। वजह एक मंत्री के खास ठेकदार है। कार्यदायी संस्था को 35 कमीशन चाहिए। जहां सरकार के मंत्री लाभ के लिए हस्तक्षेप करें मजाल किसकी है कि गुणवत्ता की जांच कर सकें।