आज तक शहीद के घर शोक संवेदना प्रकट नहीं पहुंचे यूपी सरकार के नुमाइन्दे , आर्थिक सहायता ने जख्म पर छिड़का नमक
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जौनपुर। देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए जिले के लाल संजय सिंह के परिवार के ऊपर गमो का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी के मांग का सिन्दूर भरी जवानी में ही धुल गया दो बच्चो के सिर से पिता का साया उठ गया। पिता को बुढ़ापे में जवान बेटे की अर्थी को कांधा देना पड़ा बुढ़ी मां अपने के बेटे का मुंह तक देख नही पायी। ऐसी स्थित मुख्यमंत्री द्वारा वेगैर शोक संवेदना प्रकट किये 20 लाख रूपये आर्थिक सहायता देने की घोषणा करके संजय के परिवार वालो के जख्मो पर नमक छिड़क दिया है। पिता को अफसोस है कि अखिलेश यादव व्यस्त थे तो उन्हे कम से कम मोबाईल पर ही हम लोगो को इस दुःख की घड़ी में ढाढस बधाना चाहिए था यह भी नही कर सकते थे तो हमारे जिले उनके एक कैबिनेट मंत्री दो राज्यमंत्री और दो दर्जा प्राप्त मंत्री है किसी को भी अर्थी को कंधा देने के लिए भेजना चाहिए था।
बीते 26 जून को जम्मू के पाम्पोर जिले में एक आतंकी हमले में शहीद हुए जौनपुर जिले केराकत थाना क्षेत्र भौरा गांव के निवासी सीआरपीएफ के दारोगा संजय सिंह की प्रदेश सरकार द्वारा जो उपेक्षा किया गया है उसकी निंदा पूरा जिला कर रहा है तो उनके परिजनों पर क्या बीत रही होगी इसकी कल्पना भी नही किया जा सकता। देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए संजय सिंह की अर्थी को कांधा देने जिले का कोई सांसद विधायक और मंत्री नही पहुंचा। इतना ही नही सूबह शहीद की शव यात्रा में जहां नेताओ का टोटा रहा वही शाम को कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव द्वारा बुलाई गयी रोजा इफ्तार पार्टी में भारी संख्या में नेता उपस्थित होकर दावत उड़ाते दिखाई पड़े। आज संजय को शहीद हुए चार दिन बीत चुके है ऐसे में अब तक दो सांसद और बदलापुर से विधायक ओमप्रकाश दुबे ही शहीद के घर पहुंचकर शोक संवेदना प्रकट किये है। जबकि कैबिनेट मंत्री परसनाथ यादव ने कहा था कि मै मंगलवार की सुबह ही जाकर शहीद के परिवार से मिलकर शोक संवेदना प्रकट करूंगा और प्रदेश सरकार मिलने वाली सुविधाओं को मुहैया कराऊंगा लेकिन अफसोस की बात है कि आज तक वे नही पहुंचे। खैर इनकी बात छोड़िये यहां के स्थानीय विधायक गुलाब सरोज समाजवादी पार्टी के है आज तक वे भी इस परिवार से मिलना मुनासिब नही समझा। शहीद के पिता श्याम नारायण सिंह का दर्द है कि हमारा बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया उधर मुख्यमंत्री जी वेगैर शोक संवेदना प्रकट किये 20 लाख रूपये आर्थिक देने की घोषणा करके हमारे जख्मो पर नमक छिड़क दिया है। उन्होने कहा कि हम भी सैनिक थे हम लोग पैसे के लिए नही बल्की देश के लिए सीमाओ पर दुश्मनो से लड़ते है हमारा बेटा भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हुआ है ऐसी स्थिति उनकी अंतिम यात्रा मे किसी मंत्री और विधायक शामिल न होकर यह साबित कर दिया है कि मंत्री और नेताओ को केवल वोट सी ही मतलब होता है। पिता ने बदलापुर के विधायक ओमप्रकाश का तारीफ करते हुए कहा कि वे न तो हमारे क्षेत्र के विधायक है न ही मेरा कोई जान पहचान है इसके बाद भी वे मेरे दुःख में शामिल होने के लिए आये थे। श्याम नाराणय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी को आना चाहिए थे अगर किसी व्यस्तता के कारण नही आ सके तो कम कम अपने किसी मंत्री को भेजना चाहिए था।
उधर संजय के पत्नी और बच्चो के आंखो से आशूओ की धारा रूकने का नाम नही ले रही है। पत्नी अपना सुधबुध खो बैठी है बेटी नेहा ने बताया कि जिस समय मेरे पापा की गोली लगी थी उस समय वे मम्मी से चैट कर रहे थे। चैट पर पापा ने मम्मी को बताया था कि मै कैम्प में वापस लौट रहा हूं पांच मिनट में पहुंच जाउंगा मम्मी दो बार चैट किया तो पापा कोई रिप्लाई नही आया मम्मी फोन किया तो फोन भी उठा करीब दस मिनट बाद फोन आया कि पापा को गोली लग गयी है।
बीते 26 जून को जम्मू के पाम्पोर जिले में एक आतंकी हमले में शहीद हुए जौनपुर जिले केराकत थाना क्षेत्र भौरा गांव के निवासी सीआरपीएफ के दारोगा संजय सिंह की प्रदेश सरकार द्वारा जो उपेक्षा किया गया है उसकी निंदा पूरा जिला कर रहा है तो उनके परिजनों पर क्या बीत रही होगी इसकी कल्पना भी नही किया जा सकता। देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए संजय सिंह की अर्थी को कांधा देने जिले का कोई सांसद विधायक और मंत्री नही पहुंचा। इतना ही नही सूबह शहीद की शव यात्रा में जहां नेताओ का टोटा रहा वही शाम को कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव द्वारा बुलाई गयी रोजा इफ्तार पार्टी में भारी संख्या में नेता उपस्थित होकर दावत उड़ाते दिखाई पड़े। आज संजय को शहीद हुए चार दिन बीत चुके है ऐसे में अब तक दो सांसद और बदलापुर से विधायक ओमप्रकाश दुबे ही शहीद के घर पहुंचकर शोक संवेदना प्रकट किये है। जबकि कैबिनेट मंत्री परसनाथ यादव ने कहा था कि मै मंगलवार की सुबह ही जाकर शहीद के परिवार से मिलकर शोक संवेदना प्रकट करूंगा और प्रदेश सरकार मिलने वाली सुविधाओं को मुहैया कराऊंगा लेकिन अफसोस की बात है कि आज तक वे नही पहुंचे। खैर इनकी बात छोड़िये यहां के स्थानीय विधायक गुलाब सरोज समाजवादी पार्टी के है आज तक वे भी इस परिवार से मिलना मुनासिब नही समझा। शहीद के पिता श्याम नारायण सिंह का दर्द है कि हमारा बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया उधर मुख्यमंत्री जी वेगैर शोक संवेदना प्रकट किये 20 लाख रूपये आर्थिक देने की घोषणा करके हमारे जख्मो पर नमक छिड़क दिया है। उन्होने कहा कि हम भी सैनिक थे हम लोग पैसे के लिए नही बल्की देश के लिए सीमाओ पर दुश्मनो से लड़ते है हमारा बेटा भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हुआ है ऐसी स्थिति उनकी अंतिम यात्रा मे किसी मंत्री और विधायक शामिल न होकर यह साबित कर दिया है कि मंत्री और नेताओ को केवल वोट सी ही मतलब होता है। पिता ने बदलापुर के विधायक ओमप्रकाश का तारीफ करते हुए कहा कि वे न तो हमारे क्षेत्र के विधायक है न ही मेरा कोई जान पहचान है इसके बाद भी वे मेरे दुःख में शामिल होने के लिए आये थे। श्याम नाराणय ने कहा कि मुख्यमंत्री जी को आना चाहिए थे अगर किसी व्यस्तता के कारण नही आ सके तो कम कम अपने किसी मंत्री को भेजना चाहिए था।
उधर संजय के पत्नी और बच्चो के आंखो से आशूओ की धारा रूकने का नाम नही ले रही है। पत्नी अपना सुधबुध खो बैठी है बेटी नेहा ने बताया कि जिस समय मेरे पापा की गोली लगी थी उस समय वे मम्मी से चैट कर रहे थे। चैट पर पापा ने मम्मी को बताया था कि मै कैम्प में वापस लौट रहा हूं पांच मिनट में पहुंच जाउंगा मम्मी दो बार चैट किया तो पापा कोई रिप्लाई नही आया मम्मी फोन किया तो फोन भी उठा करीब दस मिनट बाद फोन आया कि पापा को गोली लग गयी है।