मेले का मार्ग बदलकर प्रशासन ने जनपद की ऐतिहासिकता पर किया कुठाराघात
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निर्धारित मार्ग पर बैठे मेलार्थी काफी देर तक प्रतीक्षा करने के बाद निराश लौटे
जौनपुर। जिला व पुलिस प्रशासन ने जिले की ऐतिहासिकता पर जमकर हथौड़ा चलाया जिसकी चपेट में आये पूजन समितियों के लोग जहां नम आंखों से माता रानी की प्रतिमाओं को गंदे पानी में विसर्जन किये, वहीं जनपद के सबसे बड़े मेले को एक तरह से प्रशासन ने खत्म कर दिया। बता दें कि अहियापुर मोड़ से चलने वाले शोभायात्रा का मार्ग सुतहट्टी बाजार, सब्जी मण्डी, कोतवाली, चहारसू, ओलन्दगंज चैराहा, कजगांव पड़ाव के बाद नखास होते हुये विसर्जन घाट पर पहुंचना है लेकिन इस बार देखा गया कि जिला व पुलिस प्रशासन ने जहां से चाहा, शोभायात्रा को घुमाकर विसर्जन घाट तक पहुंचवा दिया जो जनपद की ऐतिहासिकता पर पूरी तरह से कुठाराघात है। मालूम हो कि मेले का निर्धारित मार्ग वर्ष 1979 से ही तय है जिसके रास्ते में जहां तमाम स्वयंसेवी संगठनों द्वारा मेलार्थियों के लिये स्टाल लगाया जाता है, वहीं दूर-दूर से आये लोग रात भर जागकर शोभायात्रा में शामिल माता रानी का दर्शन के साथ ही आकर्षक झांकी को देखते हैं लेकिन इस बार काफी देर तक शोभायात्रा का इंतजार करने के बाद उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। हालांकि न्यायालय द्वारा बस इतना आदेश है कि प्रतिमाएं नदी में विसर्जित न करके किसी गड्ढे में किया जाय जिसका जिला व पुलिस प्रशासन ने अक्षरशः पालन किया लेकिन मेले का मार्ग बदलकर जनपद के ऐतिहासिक एवं सबसे बड़े मेले पर जबर्दस्त कुठाराघात कर दिया गया जिसको लेकर जनपद में चर्चाओं का बाजार गर्म है तथा आक्रोश भी व्याप्त है।
जौनपुर। जिला व पुलिस प्रशासन ने जिले की ऐतिहासिकता पर जमकर हथौड़ा चलाया जिसकी चपेट में आये पूजन समितियों के लोग जहां नम आंखों से माता रानी की प्रतिमाओं को गंदे पानी में विसर्जन किये, वहीं जनपद के सबसे बड़े मेले को एक तरह से प्रशासन ने खत्म कर दिया। बता दें कि अहियापुर मोड़ से चलने वाले शोभायात्रा का मार्ग सुतहट्टी बाजार, सब्जी मण्डी, कोतवाली, चहारसू, ओलन्दगंज चैराहा, कजगांव पड़ाव के बाद नखास होते हुये विसर्जन घाट पर पहुंचना है लेकिन इस बार देखा गया कि जिला व पुलिस प्रशासन ने जहां से चाहा, शोभायात्रा को घुमाकर विसर्जन घाट तक पहुंचवा दिया जो जनपद की ऐतिहासिकता पर पूरी तरह से कुठाराघात है। मालूम हो कि मेले का निर्धारित मार्ग वर्ष 1979 से ही तय है जिसके रास्ते में जहां तमाम स्वयंसेवी संगठनों द्वारा मेलार्थियों के लिये स्टाल लगाया जाता है, वहीं दूर-दूर से आये लोग रात भर जागकर शोभायात्रा में शामिल माता रानी का दर्शन के साथ ही आकर्षक झांकी को देखते हैं लेकिन इस बार काफी देर तक शोभायात्रा का इंतजार करने के बाद उन्हें निराश ही लौटना पड़ा। हालांकि न्यायालय द्वारा बस इतना आदेश है कि प्रतिमाएं नदी में विसर्जित न करके किसी गड्ढे में किया जाय जिसका जिला व पुलिस प्रशासन ने अक्षरशः पालन किया लेकिन मेले का मार्ग बदलकर जनपद के ऐतिहासिक एवं सबसे बड़े मेले पर जबर्दस्त कुठाराघात कर दिया गया जिसको लेकर जनपद में चर्चाओं का बाजार गर्म है तथा आक्रोश भी व्याप्त है।