शाहगंज के ऐतिहासिक नील गोदाम पर भू-माफियाओं का अवैध कब्जा
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राष्ट्रपिता की स्मृतियों को जड़ से समाप्त करने पर तूले हैं ऐसे लोग
जौनपुर। जनपद के शाहगंज नगर के एराकियाना मोहल्ला के समीप स्थित नील गोदाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की स्मृतियों को समेटे हुये ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विराजमान है लेकिन स्वतंत्रता संग्राम की यादों को संजोने वाले गोदाम को कुछ भू माफिया इस ऐतिहासिक स्थल को जड़ से खत्म करने पर तुले हैं। इस स्थल पर अंग्रेजों द्वारा नील की खेती किसानों को बंधुआ बनाकर जबर्दस्ती कराया जाता था जिससे खेत भी बंजर हो जाते थे। इस बात की जानकारी जब महात्मा गांधी को हुई तो इसका विरोध जताने के लिये यहां आये थे लेकिन आज ऐसे ऐतिहासिक धरोहर को कुछ लोगों द्वारा मिटाने का काम किया जा रहा है। इसी को लेकर स्थानीय नागरिकों द्वारा जिलाधिकारी व पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से अपने संरक्षण में लेने सहित भू-माफियाओं के चंगुल से बचाने हेतु मांग उठ रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2010 में कुछ भू-माफियाओं द्वारा महात्मा गांधी की यादों को ताजा करने वाले इस स्थल पर बुलडोजर तक चलवा दिया गया था। ऐतिहासिक धरोहर को बुलडोजर चलवाकर जमींदोज करने के प्रकरण में कार्रवाई से कतरा रहे प्रशासनिक रुख को लेकर अब चर्चाओं का बाजार गरमा रहा है। बता दें कि वर्ष 2010 में वाराणसी से प्रकाशित एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र के बार-बार प्रमुखता से प्रकाशित करने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री रामनरेश यादव द्वारा नील गोदाम को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़वाने के लिये तत्कालीन जिला प्रसासन से वार्ता करके आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गयी थी। आदेश के उपरान्त अन्त में तत्कालीन उपजिलाधिकारी उमाकांत त्रिपाठी ने जांच का आदेश दे दिया। उनके आदेश के बाद वर्ष२2010 के तहसीलदार रामसकल मौर्या ने जिला मुख्यालय से अभिलेखों को मंगवाया। इतना ही नहीं, राजस्व निरीक्षक व लेखपाल की टीम के साथ मौके के पैमाइश की गयी। बारीकी से जांच के उपरांत अपनी रिपोर्ट उपजिलाधिकारी को सौंप दी गयी। जांच के इस बात की पुष्टि हुई कि वर्ष 1885 व 1952 के अभिलेखों में ऐतिहासिक नील गोदाम दर्ज है। अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी नील गोदाम अभिलेखों में दर्ज होने की पुष्टि हो चुकी है लेकिन प्रशासन न जाने किस कारण से ऐतिहासिक धरोहर को बुलडोजर से जमींदोज करने वाले आरोपी के विरुद्ध कारवाई से कतरा रहा है। प्रशासन के इस रुख को देखकर उसकी नियत पर प्रश्नचिन्ह लगाया जा रहा है। एक बार फिर भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल को जड़ से खत्म करने के लिये तुल गये हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि उक्त स्थल पर कुछ भू-माफियाओं द्वारा अवैध ढंग से मकान लहराते दिखायी दिया जा रहा है। अब देखना यह है कि वर्तमान जिलाधिकारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को भू-माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के अलावा पुरातत्व विभाग को सौंपने में कितने दिनों में सफल होते हैं। यहां तक कि शाहगंज नगर के लोग शहर के सारे ऐतिहासिक स्थलों को पुरातत्व विभाग को अपने संरक्षण में लेने की बात कर रहे हैं। इस संदर्भ में पत्र-प्रतिनिधि द्वारा पूछे जाने पर स्थानीय नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष ओम प्रकाश जायसवाल सहित समाजसेविका संगीता जायसवाल, भाजपा नेत्री नीलम नन्दन के अलावा अन्य नगरवासियों ने इस प्रकरण की कड़ी निंदा की है।